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क्या AI छीन लेगा सत्ता? राजनीति में 'सेकंड सिटीजन' का खतरा! राजनीति Ai's Impact Threatens Humanity
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव राजनीति और समाज में एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर रहा है: क्या हम अपनी ही पृथ्वी पर 'सेकंड सिटीजन' बन जाएंगे? पिछले कुछ वर्षों में, AI ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से अपनी पैठ बनाई है।
छात्र अब परीक्षाओं की तैयारी के लिए शिक्षकों या परिवार के सदस्यों की बजाय AI से बातचीत करना पसंद करते हैं, क्योंकि यह बिना झिझक हर प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार रहता है।
यह ‘मेटावर्स’ के माध्यम से वर्चुअल दुनिया को वास्तविक अनुभव कराता है, जिससे युवा पीढ़ी का रुझान इसकी ओर बढ़ रहा है।
युवाल हरारी जैसे विचारकों को चिंता है कि क्या हम होमो सेपियंस की अंतिम पीढ़ी हैं।
यदि पढ़ना-लिखना, सोचना-समझना, और निर्णय लेने जैसे कार्य आने वाले वर्षों में AI द्वारा किए जाएंगे, तो मनुष्य की भूमिका क्या रह जाएगी? **राजनीति** में भी, AI का उपयोग **चुनाव** रणनीतियों को बनाने, मतदाताओं को लक्षित करने और यहां तक कि नीति निर्माण में भी किया जा रहा है।
ऐसे में, **नेता** और राजनीतिक दल AI की शक्ति का उपयोग अपने लाभ के लिए कर सकते हैं, जिससे आम नागरिकों की आवाज दब सकती है।
**कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियां भी AI के इस्तेमाल को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि इसका दुरुपयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया को खतरे में डाल सकता है।
हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि AI का उपयोग मानव कल्याण और समानता को बढ़ावा देने के लिए किया जाए, न कि हमें 'सेकंड सिटीजन' बनाने के लिए।
- AI का शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता हस्तक्षेप।
- युवाल हरारी ने जताई चिंता: क्या हम होमो सेपियंस की अंतिम पीढ़ी हैं?
- राजनीति में AI का बढ़ता उपयोग, चुनाव रणनीतियों में मददगार।
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Posted on 15 January 2026 | Stay updated with sattakijung.com for more news.
