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मोहन भागवत का देश में एकता पर ज़ोर, इंसानियत ही पहचान: राष्ट्रीय आह्वान Bhagwat Promotes Unity Respect
छत्तीसगढ़ के सोनपैरी गांव से SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में देश में बढ़ रही सामाजिक तनाव की घटनाओं के बीच एकता और आपसी सम्मान पर बल दिया है।
उन्होंने एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि भारत सभी का है और किसी को भी जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड के देहरादून में एक दुखद घटना घटी, जहाँ त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा की कथित नस्लीय हमले में मौत हो गई।
इस घटना ने पूरे देश में चिंता की लहर पैदा कर दी है।
मोहन भागवत ने सामाजिक सौहार्द पर जोर देते हुए कहा कि इसकी पहली शर्त यह है कि मन से भेदभाव को खत्म किया जाए और हर व्यक्ति को अपना समझा जाए।
उन्होंने कहा कि यह पूरा देश हम सबका है, और यही भावना वास्तविक सामाजिक एकता का प्रतीक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों और धार्मिक स्थलों तक सभी की समान पहुंच होनी चाहिए और इसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए।
भागवत ने राष्ट्रीय एकता के महत्व को रेखांकित करते हुए 'इंसानियत' को सबसे बड़ी पहचान बताया, जो प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास' के दृष्टिकोण को और मजबूत करता है।
यह देश, भारत, सरकार और राष्ट्रीय स्तर पर सद्भाव स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- मोहन भागवत का बड़ा बयान: इंसानियत ही सबसे बड़ी पहचान।
- देश में सामाजिक एकता पर ज़ोर, भेदभाव खत्म करने का आह्वान।
- उत्तराखंड की घटना पर चिंता, सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए।
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Posted on 02 January 2026 | Follow sattakijung.com for the latest updates.
