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नारद मुनि का अभिमान कैसे टूटा? विष्णु लीला का आध्यात्मिक रहस्य Narad Lost In Vishnu Devotion
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीहरि के वचनों से उत्साहित नारद मुनि अपनी ही दुनिया में खो गए, मानो उनके समक्ष स्वयं नारायण हों।
मुनि के मस्तिष्क पर विश्वमोहिनी का प्रभाव था, और वे भगवान विष्णु को केवल एक साधन मान रहे थे।
नारद मुनि, श्रीहरि के वचनों को पूरी तरह सुने बिना ही विश्वमोहिनी को प्राप्त करने के प्रति आश्वस्त हो गए।
भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया कि जैसे एक रोगी को हानिकारक भोजन नहीं दिया जाता, वैसे ही मैंने तुम्हारे हित के लिए यह निर्णय लिया है।
यह कहकर भगवान विष्णु अंतर्ध्यान हो गए।
भगवान का सन्देश स्पष्ट था कि वे नारद मुनि को काम के दलदल से बचाना चाहते थे।
नारद मुनि की यह कथा धर्म और आध्यात्मिक जगत में एक महत्वपूर्ण सीख देती है।
यह बताती है कि अभिमान का त्याग करना और भगवान के उद्देश्यों को समझना आवश्यक है।
मंदिरों में इस कथा का वाचन भक्तों को प्रेरणा देता है कि वे अपनी पूजा और तीर्थ यात्राओं में अहंकार से दूर रहें।
यह घटना नारद मुनि के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जिसने उन्हें एक नई दिशा दिखाई।
देवताओं के बीच इस घटना की चर्चा आज भी होती है।
- नारद मुनि का अभिमान भगवान विष्णु की लीला से चूर हुआ।
- भगवान विष्णु ने नारद मुनि को काम के दलदल से बचाया।
- अभिमान त्याग और भगवान के उद्देश्यों को समझने का आध्यात्मिक संदेश।
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Posted on 06 January 2026 | Follow sattakijung.com for the latest updates.
