Country spotlight:
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: ₹54000 करोड़ की साइबर लूट पर सरकार बनाए गाइडलाइन Cyber Frauds Labeled Dacoity
दिल्ली।
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डिजिटल धोखाधड़ी के जरिए हुई 54 हजार करोड़ रुपये की साइबर ठगी को डकैती और लूट करार दिया है।
अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह राशि कई छोटे राज्यों के वार्षिक बजट से भी अधिक है और केंद्र सरकार को इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए तत्काल दिशा-निर्देश बनाने का आदेश दिया है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार के अपराधों में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह **भारत** में वित्तीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), दूरसंचार विभाग और अन्य संबंधित बैंकों को डिजिटल अरेस्ट के शिकार हुए पीड़ितों को उचित मुआवजा प्रदान करने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया है।
इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय को RBI और दूरसंचार विभाग के मौजूदा नियमों का गहन अध्ययन करने के बाद चार सप्ताह के भीतर एक मसौदा तैयार करने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने पहले ही इन मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है।
साथ ही, गुजरात और दिल्ली सरकार को इन मामलों में CBI जांच को मंजूरी देने का निर्देश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
यह मामला **देश** में बढ़ते साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें **सरकार** की सक्रिय भूमिका अपेक्षित है।
**प्रधानमंत्री** कार्यालय भी इस मामले पर नजर रख रहा है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह **राष्ट्रीय** सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2025 को डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने की बात कही थी, जिससे पीड़ितों को कुछ राहत की उम्मीद जगी थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने ₹54000 करोड़ की साइबर ठगी को बताया डकैती-लूट।
- केंद्र सरकार को साइबर अपराध से निपटने के लिए गाइडलाइन बनाने का आदेश।
- पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए RBI और दूरसंचार विभाग को फ्रेमवर्क बनाने का निर्देश।
Related: Technology Trends
Posted on 10 February 2026 | Visit sattakijung.com for more stories.
