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धर्म पर आस्था या दुनिया पर विश्वास? बीजेपी पर सवाल! राजनीति Faith Versus Worldly Beliefs
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में एक बड़ा भ्रम व्याप्त है: हम दुनिया पर विश्वास करते हैं, किन्तु भगवान पर विचार करते हैं।
आज हमारे चारों ओर जो कुछ भी हो रहा है, विशेषकर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में, हम उस पर आँख मूंदकर विश्वास कर रहे हैं।
जबकि भगवान के अस्तित्व और उनकी कृपा पर हम संदेह करते हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि विज्ञान जिम्मेदार हाथों में सुरक्षित है, अन्यथा यह विनाशकारी हो सकता है।
पर सवाल यह है कि जिम्मेदार कौन है? हर कोई इसका दुरुपयोग करने में लगा है।
आजकल लोग परिवार के विचारों को भी अपनी व्यक्तिगत खुशी में बाधा मानते हैं।
पहले, परिवार में रहने का मतलब था स्थायी रिश्ते और स्थायी जिम्मेदारी, लेकिन अब गैर-जिम्मेदारी का माहौल व्याप्त हो गया है।
सरकारों ने दान देकर गैर-जिम्मेदारों की फौज खड़ी कर दी है, और संस्कारों के अभाव में परिवार के सदस्य भी गैर-जिम्मेदार हो गए हैं।
विज्ञान और तकनीक इन दोनों स्थितियों का लाभ उठा रहे हैं।
इस परिदृश्य में, **राजनीति** में मूल्यों का ह्रास चिंताजनक है।
क्या **बीजेपी** और **कांग्रेस** जैसे **नेता** इस नैतिक पतन को रोकने के लिए कोई कदम उठाएंगे, या वे भी इस भ्रम का शिकार हो जाएंगे? आगामी **चुनाव** में यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा।
- विज्ञान और तकनीक पर आंख मूंदकर विश्वास, धर्म पर संदेह क्यों?
- गैर-जिम्मेदारी का माहौल, सरकारों और परिवारों की भूमिका पर सवाल।
- क्या बीजेपी-कांग्रेस नैतिक पतन रोकने के लिए कदम उठाएगी?
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Posted on 04 February 2026 | Keep reading sattakijung.com for news updates.
