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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नारी गरिमा और अधिकार स्थापित! बीजेपी की प्रत... Menstrual Health Is Fundamental Right
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने एक अभूतपूर्व निर्णय में मासिक धर्म स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया है।
यह फैसला भारत के सामाजिक विकास में एक मील का पत्थर है, जहाँ महिलाओं की स्थिति हमेशा से ही एक महत्वपूर्ण कसौटी रही है।
कोर्ट ने देश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त और सुरक्षित बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
मासिक धर्म स्वच्छता को गरिमा और स्वास्थ्य के साथ जीने के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग माना गया है, और स्कूलों में साफ-सुथरे शौचालय और पानी की उचित व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
इस निर्णय का उद्देश्य पीरियड्स के कारण लड़कियों की पढ़ाई में होने वाली बाधा को रोकना और उन्हें शर्मिंदगी से बचाना है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में "राजनीति" और "चुनाव" का माहौल गर्म है, और हर "नेता" अपनी छवि को बेहतर बनाने में लगा है।
इस निर्णय से "कांग्रेस" और "बीजेपी" दोनों ही दलों पर महिलाओं के प्रति अपनी नीतियों को और अधिक संवेदनशील बनाने का दबाव बढ़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम न केवल महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह "राजनीति" में भी एक नया आयाम स्थापित करता है, जहाँ सामाजिक न्याय और समानता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
"बीजेपी" सरकार इस फैसले को किस प्रकार लागू करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह उनकी महिला सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
- सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मासिक धर्म अब मौलिक अधिकार!
- स्कूलों में मुफ्त सैनिटरी पैड और स्वच्छ शौचालय अनिवार्य किए गए।
- राजनीति में महिला सशक्तिकरण को मिलेगा नया आयाम।
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Posted on 10 February 2026 | Check sattakijung.com for more coverage.
