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राजनीति में रिश्ते: अस्थिरता में भी आत्मीयता जरूरी, पं. विजयशंकर मेहता का विश... Politics: Friends Become Enemies
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक जीवन में कब मित्र शत्रु और शत्रु मित्र बन जाएं, यह कहना मुश्किल है।
जिन्हें बड़े लक्ष्य प्राप्त करने हैं, उन्हें समझना होगा कि स्थायी संबंधों का युग समाप्त हो रहा है।
आज जो आपके साथ हैं, कल वे विरोध में दिख सकते हैं, और विरोधी कभी भी समर्थन दे सकते हैं।
संत कहते हैं, 'समय फिरे रिपु होई पीरिते।
' समय बदलने पर शत्रु भी प्रिय हो जाता है।
देवकी के विवाह में कंस बहुत प्रसन्न था, लेकिन आकाशवाणी के बाद उसकी प्रतिक्रिया बदल गई।
यह प्रसंग दर्शाता है कि इंसान कितनी जल्दी बदल जाता है।
इसलिए रिश्तों में स्थायित्व की अपेक्षा आत्मीयता बनाए रखना आवश्यक है।
राजनीति एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ समीकरण बदलते रहते हैं।
**कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियाँ अक्सर विचारधारा के आधार पर एक-दूसरे के विरोध में खड़ी दिखाई देती हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर **नेताओं** के बीच संबंध बने रहते हैं।
आगामी **चुनावों** को देखते हुए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि **राजनीति** में व्यक्तिगत संबंधों का महत्व कम नहीं होता।
**नेता** अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, लेकिन मानवीय मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है।
बदलते राजनीतिक परिदृश्य में, रिश्तों में आत्मीयता बनाए रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है।
- राजनीति में स्थायी संबंध नहीं होते, आत्मीयता ज़रूरी।
- कंस और देवकी के प्रसंग से रिश्तों की अस्थिरता का उदाहरण।
- चुनाव में नेताओं के बदलते समीकरणों में मानवीय मूल्य ज़रूरी।
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Posted on 01 February 2026 | Keep reading sattakijung.com for news updates.
