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क्या योग बदलेगा भ्रष्टाचार? पं. विजयशंकर मेहता के आध्यात्मिक विचार Yoga Habits Eradicate Corruption
SattaKiJung की रिपोर्ट के अनुसार, पंडित विजयशंकर मेहता ने अपने कॉलम में योग को आदत बनाने पर जोर दिया है, जिससे यह स्वभाव में बदल जाए और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों से मुक्ति मिल सके।
उनका मानना है कि अच्छी आदतें वर्तमान में परिणाम देती हैं, जबकि बुरी आदतों के नतीजे भविष्य में छिपे रहते हैं।
मनुष्य के जीवन में नियमों का पालन आसान हो जाता है यदि आदतें अच्छी हों, अन्यथा बुरी आदतें नियमों को तोड़ने में आनंद देती हैं।
मेहता जी ने भ्रष्टाचार को लेकर नौकरशाहों के उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ अधिकारी मछली की तरह चुपचाप पैसा कमाते हैं, कुछ गाय की तरह मांगकर लेते हैं, कुछ बंदर की तरह छीनकर लेते हैं, और कुछ शेर की तरह लूट लेते हैं।
उन्होंने योग को एक ऐसी आदत बताया जो धीरे-धीरे स्वभाव में परिवर्तित हो जाती है, जिससे अच्छे आचरण का विकास होता है।
इस संदर्भ में, यदि **राजनीति** में हर **नेता** योग को अपनाए, तो शायद **कांग्रेस** और **बीजेपी** जैसी पार्टियों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलें, और आगामी **चुनाव** में जनता को बेहतर विकल्प मिलें।
योग के माध्यम से आत्म-अनुशासन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे **राजनीति** में भ्रष्टाचार कम हो सकता है और एक स्वच्छ प्रशासन सुनिश्चित किया जा सकता है।
- पंडित विजयशंकर मेहता ने योग को आदत बनाने पर दिया जोर।
- भ्रष्टाचार को लेकर नौकरशाहों के उदाहरणों का किया वर्णन।
- योग से आत्म-अनुशासन और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिल सकता है।
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Posted on 18 January 2026 | Stay updated with sattakijung.com for more news.
